माँ तुझसा नही कोई जहान में

पारंपरिक
माता दुर्गा कथा दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ तुझसा नही कोई जहान में न इस जमीन पे न आसमा पे

तू सम्बाले हमे तू ही पाले हमे

मुशकिलो से हमेशा निकाले हमे

माँ तुझसा नही कोई जहान में

जब आंतक था असुरो का तब रन चंडी बन हुई सहाई

चंड मुंड को मार गिराया शुंभ निशुंभ की हस्ती मिटाई

ये है लिखा हर ग्रन्थ कथा में माँ तुझ सा नही कोई यहाँ में

तू सम्बाले हमे तू ही पाले हमे

मुशकिलो से हमेशा निकाले हमे

माँ तुझसा नही कोई जहान में

आज जरूत है फिर तेरी

देर न कर अब आजा माँ भगत मुसीबत में है मैया

अमृत इन्हें पीला जा माँ

अब किस का हम दामन थामे माँ तुझसा नही कोई जहां में

तू सम्बाले हमे तू ही पाले हमे

मुशकिलो से हमेशा निकाले हमे

माँ तुझसा नही कोई जहान में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।