मेहँदी लगाई तुझको और मैं लाल हो गया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेहँदी लगाई तुझको और मैं लाल हो गया

चुनरी उड़ा के मैं भी माला माल हो गया

जब से मेरी मैया से पहचान हो गई

राहो की मुश्किलें सब आसान हो गई

जीवन का सारा ख़त्म ही जन जाल हो गया

चुनरी उड़ा के मैं भी माला माल हो गया

मेहँदी लगा ने के लिए मैया ने भुलाया

जैसे ही मेरी और अपना हाथ बडाया,

ऐसा नजारा देख मैं निहाल हो गया

चुनरी उड़ा के मैं भी माला माल हो गया

सोचा भी नही था वो माँ ने काम कर दियां

मुझ दीन पे इतना बड़ा एहसान कर दियां

सपना था जो जीवन कावो साकार हो गया

चुनरी उड़ा के मैं भी माला माल हो गया

चुनडी है कभी तो कभी मेहँदी है बहाना सोनू हमारा काम है मैया को रिजाना

मैं देखते ही रेह गया कमाल हो गया

चुनरी उड़ा के मैं भी माला माल हो गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।