इक मुस्काती कन्या के

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इक मुस्काती कन्या के मुख पर झलक दिखी है मैया की,

छम छम करती पायल उसकी याद दिलाये मैया की

इक मुस्काती कन्या के मुख पर झलक दिखी है मैया की,

सखियों संग वो झुला झुले तो बगियाँ का रूप खीले

मंद मंद मुस्काये कलिया जब ममता की धुप मिले

मगन हुई जब आँखे मेरी देख छवि उस मैया की

इक मुस्काती कन्या के मुख पर झलक दिखी है मैया की,

कोयल जैसी वाणी उसकी करती है अमृत वर्षा,

मुख से जैसे मन्त्र निकल ते वेदों की होती चर्चा

मन अति पुलकित हो बेठा जब महिमा जानी मैया की

इक मुस्काती कन्या के मुख पर झलक दिखी है मैया की,

आँख मचोली जब वो करती देख के नैना धन्य हुए

आंबे काली रूप देख कर काज मेरे समपर्ण हुए

गोविन्द गाये भजन तुम्हारा ये किरपा है मैया की

इक मुस्काती कन्या के मुख पर झलक दिखी है मैया की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।