हे आंबे जगदम्बे माँ बिटिया पुकार लगाये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे आंबे जगदम्बे माँ बिटिया पुकार लगाये,

बिटियाँ है आज खतरे में माँ आकर हमे बचाए

हे आंबे जगदम्बे माँ बिटिया गुहार लगाये,

हैवानियत की घटनाएं माँ देखो पल पल बडती जाए

बस ट्रेनों और स्कुलो में भी बेटियां देखो अब गबराए,

बिटियाँ किलकारियों से है घर आँगन को मेह्काये,

हे आंबे जगदम्बे माँ बिटिया पुकार लगाये,

इक तरफ दो बेटियां देखो घर घर में पूजी जाए

दूजी तरफ माँ बेटियां देखो तडप तडप कर है मर जाए,

बिटिया जग जननी माता बेटियां देवी कहलाये

हे आंबे जगदम्बे माँ बिटिया पुकार लगाये,

घोर कलयुग माँ आज है आया

बेटियों ने माँ कष्ट उठाया,

कोई मारे गोली कोई सिर काटे बेटीयो पर है रेहम न आया

फिर से कलयुग में आकर दुष्टों को मार गिराए

हे आंबे जगदम्बे माँ बिटिया पुकार लगाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।