बहाना जो मिले तुझको हरी को याद कर लेना

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॥ पावन पाठ ॥

बहाना जो मिले तुझको प्रभु को याद कर लेना।

बसा कर अपने ह्रदय में, यह दिल आबाद कर लेना॥

ख़ुशी हो या बहारे हों, उसी का शुक्रिया करना।

अगर गम की घटा छाए, तो फिर फ़रियाद कर लेना॥

ख्यालों में बसा लेना, ख्वाबो में सजा लेना।

प्रभु बिन चैन ना आवे, तो दिल बेताब कर लेना॥

भले अमृत की बेला हो, या हो सोने की तयारी।

सलोनी सावरी सूरत को नैनो में बसा लेना ॥

सुरीली सरगमे छेड़ो, प्रभु के गीत गा गा कर।

प्रभु को दिल में रख लेना, तो फिर फ़रियाद कर लेना॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।