तुम ही देवता हो तुम ही मीत मेरे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

तुम ही देवता हो तुम ही मीत मेरे

तुम्ही प्राण वीणा के संगीत मेरे

तुम ही देवता हो तुम ही मीत मेरे

तुम ही मन के मंदिर में दीपक सलोने

मधुर ज्योति में हस रहे चारो कोने

हर इक सास आती है,

दीपक संजोने तुम्ही हो अँधेरे छनो के सवेरे

तुम्ही प्राण वीणा के संगीत मेरे

तुम ही देवता हो तुम ही मीत मेरे

व्यथा वार मन प्राण कब तक सहे गे,

नयन आज तुम से हिरदये की कहे गी

सदा रेन दिन श्री चरण में रहगे

वकुल फूल से प्रीत के गीत मेरे

तुम्ही प्राण वीणा के संगीत मेरे

तुम ही देवता हो तुम ही मीत मेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।