दुनिया से अलग है न्यारा है

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॥ पावन पाठ ॥

दिल में साईं मंदिर तेरा तू है प्यारा सतगुरु मेरा

दुनिया से अलग है न्यारा है साईं तेरा मेरा नाता

क्या बोलू अपनी जुबान से मैं तू अंतर यामी है दाता

दिल से दिल का रिश्ता क्या है लव्जो में बताना मुश्किल है

अपने एहसास का दुनिया को एहसास करना मुश्किल है

पूछे जो कोई बतलाऊ क्या जग को मैं नही समजा पाता,

दुनिया से अलग है न्यारा है साईं तेरा मेरा नाता

संतान नही साईं मैं तेरी पर प्यार है तेरा वैसा ही

ममता है तेरी माँ के जैसी

व्यवहार पिता के जैसा ही सुख हो दुःख हो तेरे होते

मन बिलकुल भी नही गबराता

दुनिया से अलग है न्यारा है साईं तेरा मेरा नाता

नजदीक सदा रहना साईं दुरी नही तेरी सेह सकता

हर इक सितम सेह सकता हु

नही तेरी जुदाई सेह सकता

जज्बा ये तेरा नजदीकी का साहिल के दिल को है धड्काता

दुनिया से अलग है न्यारा है साईं तेरा मेरा नाता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।