सुन ले विनती मेरी शारदे माँ मेरा सोया मुकदर जगा दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुन ले विनती मेरी शारदे माँ मेरा सोया मुकदर जगा दे

देदे दर्शन तू महियर बुला कर आस मुदत की मेरी पूरा दे

सुन ले विनती मेरी शारदे माँ मेरा सोया मुकदर जगा दे

तुम तो उज्ड़ो को आबाद करती हो माँ

मांग ने वालो की झोली भरती हो माँ

ज्ञान भुधि का वरदान देती हो माँ

बाँझ को पुत्र का दान देती हो माँ

अपनी भगती का धन आज दे कर मुझको धनवान मैया बना ले

सुन ले विनती मेरी शारदे माँ मेरा सोया मुकदर जगा दे

जो भी आता है महियर सवर जाता है

उनसे वरदान पा कर निखर जाता है

जग में सब से निराला ये दरबार है

रोज होता है याहा पर चमत्कार है

आला जैसे ही ये शारदा माँ फूल भगती का दिल में खिला दे

सुन ले विनती मेरी शारदे माँ मेरा सोया मुकदर जगा दे

आरती मिशरा पे माँ तू ये एहसान कर

आप सच कर सभी पुरे अरमान कर

गाये गीत मुझे जग में इज्जत माँ

मांगती हु मुझे खूब शोरत दे माँ

आरजू है मेरी भी ये मैया तू जगह सब के दिल में बना दे

सुन ले विनती मेरी शारदे माँ मेरा सोया मुकदर जगा दे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।