ओ रे पिया तो से लागी लगन

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा दिल में धड़का जाए मेरी सांसे थम थम जाए

मुझे प्यार नजर आया मेरा चाँद नजर आया

ओ रे पिया तो से लागी लगन,

मैं अलबेली मैं मतवाली बन गई तेरी प्रेम दीवानी

ओ रे पिया तो से लागी लगन,

दिल ये पुकारे राह निहारे पल पल तडपा जाए

प्यासी अँखियाँ प्यासे नजारे आजा तुझे बुलाये

रात सुहागन वाली है हाथो में पूजा की थाली है

करवा चोथ जो आया मुझे चाँद नजर आया

ओ रे पिया तो से लागी लगन,

चाँद को देखू व्रत मैं तोडू तेरे हाथ से पीलू मैं पानी

मेरे भाग जगे अरमान खिले मैं बन जाऊ तेरी रानी

रात सुहागन वाली है हाथो में पूजा की थाली है

करवा चोथ जो आया मुझे चाँद नजर आया

ओ रे पिया तो से लागी लगन,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।