सजी रहे राहे उनकी फूलो से सदा

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॥ पावन पाठ ॥

सजी रहे राहे उनकी फूलो से सदा

कभी कोई गम उन्हें पाए न सता,

बुरा चाहे हो वो चाहे भला

मेरे लिए मेरा पति है देवता

सजी रहे राहे उनकी फूलो से सदा

जोड़ी बनाई इश्वर ने सातो जन्म का है नाता

साथ निभाये हर पल मेरा वो मेरे भाग्य विध्याता,

सेवा में इनकी जीवन गुजारु बुले से भी कभी मुझसे हॉवे न खता

सजी रहे राहे उनकी फूलो से सदा

प्रेम से घर को स्वर्ग बनादे जीते भरोसा से तन मन

रूठे कभी जो भाग्य हमारे बर्सादे स्नेह का सावन

पूरी करो प्रभु ये कमाना

रहे हरी बरी ग्रेस्थी की ये लता

सजी रहे राहे उनकी फूलो से सदा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।