मैं निमाणी करां अरजोई

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मैं निमाणी करां अरजोई

किरपा निधान प्रभु ठाकुर जीयो,

तुझ बिन नैनं नींद न आवे

मोरे राम राम रहीम

मोरे राम राम रहीम

मैं निमाणी करां अरजोई

करत करीम पुरख विधाते ,

पीर बिन किवे जीन

मैं निमाणी करां अरजोई ...

दियाल होवे जन अपने

साधू संग संग दीजिये

मैं निमाणी करां अरजोई

हरी ॐ हरी कर मन मेरे

दर्शन नीच तेरा कुकर,

दया मेहर करीजे

मैं निमाणी करां अरजोई

ਮੈਂ ਨਿਮਾਣੀ, ਕਰਾਂ ਅਰਜ਼ੋਈ,

ਕਿਰਪਾ ਨਿਧਾਨ ਪ੍ਰਭ, ਠਾਕੁਰ ਜੀਓ ll

ਤੁਝ ਬਿਨ ਨੈਨਣ, ਨੀਂਦ ਨਾ ਆਵੇ,

ਮੇਰੋ ਰਾਮ, ਰਾਮ ਰਹੀਮ ll

ਮੇਰੋ ਰਾਮ, ਰਾਮ ਰਹੀਮ,,,

ਮੈਂ ਨਿਮਾਣੀ,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਕਰਤ ਕਰੀਮ, ਪੁਰਖ ਵਿਧਾਤੇ,

ਪੀਰ ਬਿਨ, ਕਿਵੇਂ ਜੀਣ ll

ਪੀਰ ਬਿਨ, ਕਿਵੇਂ ਜੀਣ,,,

ਮੈਂ ਨਿਮਾਣੀ,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਦਿਆਲ ਹੋਵੋ, ਜਨ ਆਪਣੇ,

ਸਾਧੂ ਸੰਗ, ਸੰਗ ਦੀਜੈ ll

ਸਾਧੂ ਸੰਗ, ਸੰਗ ਦੀਜੈ,,,

ਮੈਂ ਨਿਮਾਣੀ,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਹਰੀ ਓਮ ਹਰੀ, ਕਰ ਮਨ ਮੇਰੇ,

ਦਰਸ਼ਨ ਨੀਚ, ਤੇਰਾ ਕੂਕਰ ll

ਦਇਆ ਮੇਹਰ, ਕਰੀਜੈ,,,

ਮੈਂ ਨਿਮਾਣੀ,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਅਪਲੋਡਰ-ਅਨਿਲਰਾਮੂਰਤੀਭੋਪਾਲ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।