चाँद जैसे चोथ को मेरा बालमा

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॥ पावन पाठ ॥

चाँद जैसे चोथ को मेरा बालमा

चाँद से भी है प्यारा मेरा साजना,

मैंने उपवास रखा पिया के लिए

जो जिया है मेरा उस जिया के लिए

मेरा सिंदूर ये मुस्कुराता रहे

बुज भी जाउ मैं ये जगमगाता रहे

चाँद जैसे चोथ को मेरा बालमा

चूड़ीया मेरी खंन खन खनकती रहे

तेरे होठो पे खुशियाँ बिखर ती रहे

अपनी किस्मत पे मैं इतराती रहू

प्यार से मैं पिया के सवरती रहू

चाँद जैसे चोथ को मेरा बालमा

जब तलक अपने साजन के आंगन रहू

आखिरी साँसे तक मैं सुहागन रहू

मुस्कुराती रहे मांग मेरी सदा

जाऊ साजन के कानधो पे होके विधा

चाँद जैसे चोथ को मेरा बालमा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।