मन ललचाये रे दिल गबराए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मन ललचाये रे दिल गबराए तनक दर्श दे माँ काहे नही आये,

अरे तेरे दर्श को माँ हम सब आये तनक दर्श दे माँ काहे नही आये,

काहे नही आये मा काहे नही आये

तनक दर्श दे माँ काहे नही आये,

महियर नगर में मेला लगो है,

जय हो माई की जय कारे लगाये

तनक दर्श दे माँ काहे नही आये,

हम दुख्यारे माँ द्वारे पे आये

द्वारे पे आये माँ द्वारे पे आये,

अरे मन की मुरादे माँ संग में लाये

तनक दर्श दे माँ काहे नही आये,

ज्योति तेरे चरणों की दीवानी

भगत अकेला माँ यश तोरे गाये

तनक दर्श दे माँ काहे नही आये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।