पापी को भी देती है तार

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पापी को भी देती है तार माँ नर्मदे अमृत है तेरी धार ,

अमृत है तेरी धार हो रेवा मैया अमृत है तेरी धार,

युग युग तेरी जय जय कार माँ नर्मदे सब की है तू रखवार

पापी को भी देती है तार माँ नर्मदे अमृत है तेरी धार ,

सांझ शेहर में निरमल जल में जग मग ज्योत बहाऊ,

निशदिन तेरी करू आरती तेरी महिमा गाऊ माँ,

सब की नैया को करती है पार माँ नर्मदे सब की है तू रखवार

पापी को भी देती है तार माँ नर्मदे अमृत है तेरी धार ,

तेरे दर्शन से ही माता सारे मुक्ती पाते,

जो भी तेरे शरण में आये भव से वो तर जाते माँ,

तोफानो से देती उबार माँ नर्मदे छोड़ना न कभी मजधार

पापी को भी देती है तार माँ नर्मदे अमृत है तेरी धार ,

ऋषि मुनि सब देवी देवता करते तेरा बखान

तू ही सुख देने वाली माँ जन जन कर करे गुण गान,

कीर्ति पे करे उपकार माँ नर्मदे जीवन का कर उपकार

पापी को भी देती है तार माँ नर्मदे अमृत है तेरी धार ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।