चली चली देखो चली काली माई

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

रूप ले विकराल चली पेहरे मुंड माल चली शक्ति महा शक्तिशाली

क्रोध में हुंकार चली कालो का काल चली जाए न वार जिनका खाली

चली चली देखो चली काली माई

काली काली देखो अमावस की रात है,

बजरंगी भेरव मेरी मैया के साथ है,

कर में खप्पर धार चली भर के चारो हाथ चली मासा न कोई बलशाली,

क्रोध में हुंकार चली कालो में काल चली जाए न जिनका वार खाली

चली चली देखो चली काली माई

चंड मुंड आई ली बारा बुजा ली

काल बन के टूट पड़ी उनपे माँ काली,

मुंड कांट झांट चली करने माँ संगार चली योगियां मारे किलकारी

क्रोध में हुंकार चली कालो में काल चली जाए न जिनका वार खाली

चली चली देखो चली काली माई

शुनब निशुन्ब रक्त बीच दानव सब मारे

चामुंडा चंडी ने हनन कर डाले,

रोद्र रूप मात चली बीती रकत धार चली असुरो से धरती भई खाली

क्रोध में हुंकार चली कालो में काल चली जाए न जिनका वार खाली

चली चली देखो चली काली माई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।