मैया दो ऐसा वरदान सुहागन रहूं सदा

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॥ पावन पाठ ॥

मैया दो ऐसा वरदान सुहागन रहूं सदा,

रहे अमर यही अरमान सुहागन रहू सदा,

माथे की बिंदिया चाँद सी चमके

दूर रहे सदा बादल गम के,भरी मांग रखना ध्यान

सुहागन रहू सदा...

सिर पे रहे सदा लाल चुनरियाँ,

साजन की रहू सजी सजनिया,

रहे हाथो पे मेहँदी निशान

सुहागन रहू सदा,

भरी रहे चूडियो से कलाई

लेती रहू प्रीतम की भलाई,

पायल की रहे गुंजान

सुहागन रहू सदा,

प्रीत पिया की सदा ही पाऊ,

गीत सदा माँ तेरे मैं गाऊ,

माँ तुम्हे सम्बालो आन

सुहागन रहू सदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।