ऐ मेरे स्वामी अंतरयामी

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

ऐ मेरे स्वामी अंतरयामी नित जपते तेरा नाम

तेरे भरोसे छोड़ दी नैया तू जाने तेरा काम

ऐ मेरे स्वामी अंतरयामी

जीवन के गेहरे सागर में उठ ते है तूफ़ान

छलके अखियाँ रोये मनवा बेबस हु भगवान

तेरी किरपा हो जाए जिस पे मिलता सुख आराम

ऐ मेरे स्वामी अंतरयामी

तेरे पावन चरण को छु के पत्थर भी तर जाते

टूटी डाली से गूजे भी मधुवन सा मुस्काते

पल पल ढलती जाए भगवन इस जीवन की शाम

ऐ मेरे स्वामी अंतरयामी...

तेरे चरण की धुल से मैंने सुख के मोती पाए ,

तूफ़ान भी मुख मोड़ ले अपना तू जो कर्म कमाए

केवल तेरी प्रीत है साँची छुटे न तेरा धाम

ऐ मेरे स्वामी अंतरयामी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।