पटना के घाट पर

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॥ पावन पाठ ॥

पटना के घाट पर हमहु अरगिया देब हे छठी मइया,

हम ना जाइब दूसर घाट देखब ऐ छठी मइया ,

सूप लेले ठाड़ बाड़े डोम डोमिनिया , देखब ऐ छठी मैया

ओहे सुपे अरग देवाइब ,देखब हे छठी मइया ,

फूल लेले ठाड़ बाड़े मलिन मलिनिया ,देखब हे छठी मइया

ओहि फुले हारवा गोथाइब ,देखब हे छठी मइया,

केला सेब नरियल किने गइनी हम बजरिया ,देखब हे छठी मइया

ओहि जगह होता देरिया ,देखब हे छठी मइया,

भूल चूक हमरी मइया राखब धिआनिया ,देखब हे छठी मइया

हमरो अरगिया देहब मान ,देखब हे छठी मइया,

पटना के घाट पर हमहू अरगिया देब हे छठी मइया ,

हम ना जाइब दोसर घटिया देखब हे छठी मइया ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।