किस चीज की कमी है साईं तेरी गली में

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॥ पावन पाठ ॥

किस चीज की कमी है साईं तेरी गली में॥

रहमत बरस रही है साईं तेरी गली में॥

फुल्लो की तरह सबके चेहरे खिले हुए है॥

हर आख बोलती है ॥साईं तेरी गली मै

किस चीज की कमी है....

मैं तेरे दर से उठ कर जाऊ तो कैसे जाऊ॥

जननत मुझे मिली है ॥साईं तेरी गली मै,

किस चीज की कमी है....

साईं तुम्हारा आंगन है प्यार वाला आंगन॥

चाहत की रोशनी है साईं तेरी गली में,

किस चीज की कमी है....

सब को सुनाई बिपदा दर दर फिरा मै लेकिन॥

बिगड़ी मेरी वनी है॥ साईं तेरी गली मे,

किस चीज की कमी है....

सब कुछ मुझे मिला है तेरे ही दर पर आ कर॥

झोली मेरी भरी है साईं तेरी गली में,

किस चीज की कमी है....

रोशनी हमको दी अपने दीदार से,

तूने देखा हमारी तरफ दीदार से,

कोई शिकवा गिल्ला हम करे भी तो क्यों,

हमको सब कुछ मिला तेरे दरबार से

किस चीज की कमी है

जागता था जो मन उसको तूने सिया,

अपनी रहमत के साए मे हमको लिया,

सारी दुनिया से है शान तेरी जुदा,

तूने मंगतो को सब कुछ दिया,

किस चीज की कमी है....

हाल किसको सुनिए भिखारी तेरे,

जखम किसको दिखाए भिखारी तेरे,

तेरे जैसे कोई और दाता कहा,

क्यों किसी दर पर जाइये विखारी तेरे,

किस चीज की कमी है....

तेरे जैसा ना देखा कोई भी जहा,

तेरे कब्ज़े मै है साईं सारा जहा,

मेरे दिल में है जो तेरी नज़रो मे है,

किस चीज की कमी है....

तुम मोहोबत हो मेरी मेरा प्यार हो,

साईं तुम मेरे जीवन का अधर हो,

कोई अपना नही है तुम्हारे सिवा,

मैं मंगता हु तुम्हारे द्वार का

किस चीज की कमी है....

मैं पुजारी हु और मेरी पूजा हो तुम,

मै भिखारी हु और मेरे दाता हो तुम,

मेरे दिल की तरफ हो नजर प्यार की,

तुम ही लाज पाल हो लाज रखलो मेरी,

किस चीज की कमी है....

किसको जाकसुनाऊ घटा दर्द की,

दिल पर छाए हुई है घटा दर्द की,

कोई सुनता नही है मेरी दासता,

तू ही बता जाऊ तो जाऊ मै कहा,

किस चीज की कमी है....

तू देता है सब को बड़े प्यार से,

कोई खली ना लोटा है दरबार से,

तुमने जो भी किया है भला ही किया,

जिस ने जो तुम से मांगा वो ही तूने दिया,

किस चीज की कमी है....

रहमत बरस रही है साईं तेरी गली मे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।