चुनरिया ओढ़ के

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

असो नवरातर चलत सांवरिया सगरो देवी माई के दुवरिया

असरा सनेहिया के जोड़ के,

चुनरिया ओढ़ के

दुर्गा कुंड बनारस में बा माई के पावन धाम हो

मुगल सराय के काली माई कई डेली कल्याण हो

अष्टभुजी माई बड़ी दयालु शिवपुर बा स्थान हो

गंगा तीरे बड़ी शीतला भक्तन के राखें मान हो

कोटवा बज़ार चल मुक्तिनाथ मंदिरिया,

गंगा किनारे मंगला माई के अटरिया,

दर्शन करब करजोर के चुनरिया ओढ़ के

शक्तिनगर में ज्वालामुखी के तीरथ जग से न्यारी बा

तारा चण्डी माई मुंडेश्वरी सासाराम दुवारी बा

भावे धाम गोपालगंज जे दर्शन कइके आइल बा

श्रद्धा भाव से जे भी गइल ओकर मंशा पुराइल बा

पल्हना परम ज्योति माई के बखरिया

बाड़ी कामक्ष्या माई गाजीपुर शहरिया

आवेली आसान छोड़ के चुनरिया ओढ़ के

हथुवा मार्केट दुर्गा पूजा देखी के भइली निहाल हो

पूरे पूर्वांचल में देखलीं ना अइसन पण्डाल हो

माई के किरपा कुछ इहवाँ ना केहू कंगाल हो

काशी नगरी जे भी आइल हो गइल मालामाल हो

रंजन,इनाम,दीपक बनके पूजरिया

मधुर के पचरा सुनिहं होत भोरहरिया

चक्कर झमेलवा के छोड़ के चुनरिया ओढ़ के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।