जय आर्य

पारंपरिक
हनुमान जी भजन देश भक्ति भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

जय आर्य जय आर्य जय आर्य जय आर्य

जय आर्यावर्त जय आर्यावर्त

जय आर्यावर्त जय आर्यावर्त

इस देश के युवा जाग उठो

नव राष्ट्र का निर्माण करो

राम कृष्ण हनुमान के सिद्धांत हे अनिवार्य

जय आर्य जय आर्य जय आर्य जय आर्य

संध्या और उपासना यज्ज्ञादी हम करते रहे

छल कपट और पापनिच बुरे कर्मो से डरते रहे

विष्णु गुप्त चाणक्य से हमे चाहिए फिर आचार्य

जय आर्य जय आर्य जय आर्य जय आर्य

ऋषीयों के उपदेशों को हम भुलते है जा रहे

देशद्रोही देश को सब लुट कर है खा रहे

आझाद भगत और बिस्मील का अभी बडा अधुरा कार्य

जय आर्य जय आर्य जय आर्य जय आर्य

ऋषी दयानंद के सपनो को पुरा करके दिखाएंगे

हम सब मिलकर राष्ट्र को पुन्हा आर्यावर्त बनाएंगे

बन जाओ सब श्रेष्ट तुम अब रहे ना कोई अनार्य

जय आर्य जय आर्य जय आर्य जय आर्य

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।