हो अगर रहमत जो तेरी साँवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हो अगर रहमत जो तेरी साँवरे,

जख्म दिल का हर कोई भर जाएगा,

दूर सब कोई नही है पास में,

यूँ अकेले दम मेरा घुट जाएगा

मैं आया था ज़माने में,

तेरे सुमिरन का वादा था,

जा बैठा स्वार्थ की महफ़िल,

पाप अभिमान ज्यादा था,

भूलकर के श्याम तेरी बंदगी,

चैन मेरे दिल को कैसे आएगा,

हो अगर रहमत जो तेरी सांवरे,

जख्म दिल का हर कोई भर जाएगा

बड़ी बेदर्द है दुनिया,

भरोसा क्या करू इस पर,

हमेशा साथ था जिसके,

वहीँ से आ रहे पत्थर,

रहम कर दो मेरे मन पे साँवरा,

छोड़के कही और फिर ना जाएगा,

हो अगर रहमत जो तेरी सांवरे,

जख्म दिल का हर कोई भर जाएगा

सुना है श्याम तू भटकों को,

मंजिल से मिलाता है,

पौंछकर दीन के आँसू,

गले अपने लगाता है,

मुझपे भी करदे कृपा की बारिशें,

ये ‘मुकेश’ तेरा ही गुण गायेगा,

हो अगर रहमत जो तेरी सांवरे,

जख्म दिल का हर कोई भर जाएगा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।