क्या वह स्वभाव पहला

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॥ पावन पाठ ॥

क्या वह स्वभाव पहला सरकार अब नहीं है,

दीनों के वास्ते क्या दरबार अब नहीं है

या तो दयालु मेरी दृढ़ दीनता नहीं है,

या दीन कि तुम्हें ही दरकार अब नहीं है,

जिससे कि सुदामा त्रयलोक पा गया था,

क्या उस उदारता में कुछ सार अब नहीं है

क्या वह स्वभाव पहलां सरकार अब नहीं है,

दीनों के वास्ते क्या दरबार अब नहीं है

पाते थे जिस ह्रदय का आश्रय अनाथ लाखों,

क्या वह हृदय दया का भण्डार अब नहीं है

दौड़े थे द्वारिका से जिस पर अधीर होकर,

उस अश्रु बिन्दु से भी क्या प्यार अब नहीं है।

क्या वह स्वभाव पहलां सरकार अब नहीं है,

दीनों के वास्ते क्या दरबार अब नहीं है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।