भैरो नाथ अघोरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं हु भेरो नाथ अघोरी मुझको मत न समज टपोरी

न हलवा पूडी आते राज मंगाए दे मुझको मदिरा मॉस

सुन ले भेरो नाथ अगोरी तेरी है गई जीब चटोरी

धर्म का नही तुझे एहसास

मिलेगा न तुझे मधिरा मॉस

मधिरा मॉस मुझे है प्यारा दे मर्जी का मुझे अहारा

वैष्णो माँ का है भंडारा नही चलेगा हुकम तुमहरा

क्यों ज्यदा करता है बकवास

मिलेगा न तुझे मधिरा मॉस

बाते तेरी नीम करेला अन्दर से तेरा दिल है मैला

आया हु मैं नही अकेला आये है मेरे साथ में चेला

क्यों करती है हमे नराज मंगाए दे मुझको मदिरा मॉस

ना कोई योगी मेरे बराबर क्यों करती है मेरा निरादर,

लिखे अनाडी शब्द मिला कर

भोजन करले भोग लगा कर,

बना है भोजन बड़ा ही ख़ास

मिलेगा न तुझे मधिरा मॉस

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।