नीली छत के पिछे बैठा जाने कौन मदारी

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

नीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारी

जैसे जैसे नाच नचाए नाचे दुनियाँ सारी

नीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारी

सिया राम जय जय राम सिया राम जय जय राम

निराकार कोई कहता है, कोई कुछ कुछ रूप बताए

कोई कहे हो भेष बदलकर धरती पर आ जाए

कोई कहे वो कण कण में है पर वो नजर ना आये

वो वह अनदेखा एक पहेली ना सुल्जाई जाए

नीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारी

जैसे जैसे नाच नचाए नाचे दुनियाँ सारी

कहते हैं उसकी आंखें हैं सूरज चांद सितारे

कब-कब हम करते हैं क्या-क्या पल पल हमें निहारे

मछली को टाले ना जो उथले सागर के धारे

उस शक्ति की भक्ति कर ले ओ बंदे मतवारे

नीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारी

जैसे जैसे नाच नचाए नाचे दुनिया सारी

कहते हैं जिसने बनाए धरती गगन समंदर

और सबको जो नाच नचाये है इक छुपा कलंदर

वो मालिक छुप कर बैठा है हर इंसान के अंदर

प्रेम भाव से सबसे मिलना इस दुनिया में सिकंदर

नीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारी

जैसे जैसे नाच नचाए नाचे दुनिया सारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।