गरीब है

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॥ पावन पाठ ॥

हमे फ़कीर जान के खैरात जिसको दी

उस ने दुआए देकर मुकदर बना दिया

गरीब है गरीब है

होठो पे सदा ये उदास चेहरा अजीब है

गरीब है गरीब है

रूठा जो कभी हमसे तो हम मना लेंगे अपने साईं को

दिल का जो हाल अपना है हम बताये गे अपने साईं को

साईं को बताये सब के दिल का हाल

साईं जी किरपा करे इक दिन तो सब हो जाए माला माल

गरीब है गरीब है

साईं जी अपने भगतो से प्यार करते है हर घडी

साईं ने आके सम्बला है जब मुसीबत कोई भी पड़ी

साईं ने ही बदला है शिर्डी का पुरहा

लक्ष्मी को माया दी कोडी को काया दी

साईं का है ये कमाल

गरीब है गरीब है

साईं ने सारी दुनिया को इक महोबत का सबक बडाया है

भटके थे जो भी राहो से उसको साईं ने रस्ता दिखाया है

साईं जी करो मुझपे किरपा करो मालामाल

साईं जी करदो रेहम की नजर न किसी को रहे ये मला

गरीब है गरीब है

साईं से जिसे महोबत है

उसकी दुनिया में शान और शोखत है

साईं जी सब जानी जाते है जिस भिखारी की जो भी जररूत है

साईं ने किया न कभी भी किसी से सवाल

हमसर का नासिर का सी जी रख लीजिये गा जरा सा ख्याल

गरीब है गरीब है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।