जोगियां तेरे द्वार आ गया मेरे साईं

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॥ पावन पाठ ॥

जोगियां जोगियां

चरणों से अपने लगा ले

मेरे साईं शिरडी वाले,

जोगियां तेरे द्वार आ गया मेरे साईं

साईं मेरी बिगड़ी बना दे मन आँगन में फूल खिला दे

दुःख की छाया तन से हटा दे

सुख की मधिरा मुख को पिला दे

किरपा नजर अब मुझपे कर दे

खाली मेरी झोली भर दे

कष्टों से मुझको बचा ले

मेरे साईं शिर्डी वाले

जोगियां तेरे द्वार आ गया मेरे साईं

तुम ही साईं जग के दाता किरपा करदो आज विध्याता,

तेरा भजन मैं हर दिन गाता नाम की तेरे रटन लगा ता,

सोया मेरा भाग जगा दे

सुख की ज्योति बाबा जगा दे

फेला मन में अब उजाले

मेरे साईं शिर्डी वाले

जोगियां तेरे द्वार आ गया मेरे साईं

आस की डोरी टूट न जाए तेरी संदेया छुट न जाए

दुःख की तेरी लुट न जाए सुख की हांडी फुट न जाए

भव सागर से पार लगा दे चिंता मेरी साईं मिटा दे

खुद को किया तेरे हवाले,

मेरे साईं शिर्डी वाले

जोगियां तेरे द्वार आ गया मेरे साईं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।