ये दुनिया तुझे कुछ नहीं देने

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॥ पावन पाठ ॥

ये दुनिया तुझे कुछ नहीं देने वाली

साईं के दर पे चला जा सवाली

ये दुनिया तुझे कुछ नहीं देने वाली

वाहा जिस बछर ने है सिर को जुकाया

भिखारी था जो बादशाह बन के आया

तू साईं की सूरत का बन जा दीवाना

मिलेगा तुझे रहमतो का खजाना

है साईं के चेहरे पे सूरज की लाली

साईं के दर पे चला जा सवाली

ये दुनिया तुझे कुछ नहीं देने वाली

तू आवाज दे साईं सुन लेगा तेरी सुनी जैसे साईं ने फरयाद मेरी

सदा आस तेरी वो पूरी करेगा खुशियों से वो तेरा दामन भरे गा,

नही बात उस ने किसी की है टाली,

साईं के दर पे चला जा सवाली

ये दुनिया तुझे कुछ नहीं देने वाली

ये दुर्गा भवानी की शक्ति है साईं

ये विष्णु बरमा की भगती है साईं

ये शंकर की माला की मनको में रेहता,

ये सच मनाना जो तुझे दास केहता

है चरणों से साईं ने गंगा निकाली,

साईं के दर पे चला जा सवाली

ये दुनिया तुझे कुछ नहीं देने वाली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।