जन्म दिन आया है आज वाल्मीकि भगवान का

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॥ पावन पाठ ॥

जन्म दिन आया है आज वाल्मीकि भगवान का,

भागा वाली पुनेया आई

हर कोई एह गल जान दा,

जन्म दिन आया है आज वाल्मीकि भगवान का,

सारे पासे रोनका लगियां खिलियाँ ने गुलजारा,

धरती नचदी अम्बर नचदी नच्दा इक इक तारा

खुशियाँ दे नाल खिडेयाँ फिरदा चेहरा हर इंसान दा,

जन्म दिन आया है आज वाल्मीकि भगवान का,

घर घर दे विच ज्योत है जग दी वाल्मीकि दे नाम दी

ना गुरु दा जो न लेवे ओ जीबा किस काम दी,

उची ला लो जय जय कारे घस्दा की है जुबान दा,

जन्म दिन आया है आज वाल्मीकि भगवान का,

भगती वाला केके है वंडना आजो भगतो खा लो जी

शालू वांगु वाल्मीकि दे आजो दर्शन पा लो जी

गुरा दी किरपा नाल है लिखदा काला पिंड करपान दा,

जन्म दिन आया है आज वाल्मीकि भगवान का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।