तूम मुझे यु जला न पाओगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तूम मुझे यु जला न पाओगे,

जैसे लंका जली जला मैं भी इक दिन तुम भी जलाए जाओगे

तूम मुझे यु जला न पाओगे,

मैंने सीता हरी हरी के लिए रक्षक कुल की बेहतरी के लिए

मैंने रुलाया प्रभु को वन वन में

तुम हरी को रुला न पाओगे

तूम मुझे यु जला न पाओगे,

आज रावन से राम डरते है आज लक्षमण भी सीता हरते है

छीने हक आज भरत भाई का श्तुरता शत्रु धन में पाओ गे,

तूम मुझे यु जला न पाओगे,

सीता हरना तो इक बहाना था मैंने दर्शन प्रभु का पाना था,

मैंने जल कर भी नाम अपना किया

बेधक् तुम जलाए जाओगे

तूम मुझे यु जला न पाओगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।