जरा चलके विन्ध्याचल में देखो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जरा चलके विन्ध्याचल में देखो

माता किरपा लुटाती मिलेगी

गंगा तट पर बैठी मेरी मैया सारे भगतो की पार करे नैया

भूले भटके भगतो को महारानी याहा रस्ता दिखाती मिलेगी

जरा चलके विन्ध्याचल में देखो

उचे पर्वत अस्त बुजी महारानी

काली खो में काली कल्याणी

अपने भगतो को अपने बेटो को

प्यार देके उनकी याहा बिगड़ी बनाती मिले गी

जरा चलके विन्ध्याचल में देखो

जय हो जय हो माँ विध्याचल भवानी

रखना हर दम शरण में महारानी अपने बेटे देवेंदर को भी मैया अपने गले से लगती मिलेगी

जरा चलके विन्ध्याचल में देखो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।