माता संग जग माता के धाम ये भैया

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

प्रतापगढ़ में चंदीपुर धाम ऐ भैया

माता संग जग माता के धाम ये भैया

माँ की आरती और भजनों से होता सवेरा

दुनिया में अद्भुत है ऐसा चंदीपुर मेरा,

भगती में शक्ति का है बस काम ऐ भैया

माता संग जग माता के धाम ये भैया

दो हजार दस में मैया का आना हुआ था याहा

बरसती है नित किरपा जानता जहां,

चेत और नोराती की दिव्य है शाम एह भैया

माता संग जग माता के धाम ये भैया

माँ फूल कलि हुई धन्ये जिनके अरुण पुत्र हुए

माँ के सपनों का ये धाम तीर्थ बना दिए

गाता है दवेंदर माँ का नाम ऐ भैया

माता संग जग माता के धाम ये भैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।