दर तेरे आ गया मेरी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर्शन की माँ मन में है कामना,

मेरे सिर पे माँ रखदे तू हाथ

दर तेरे आ गया मेरी माँ

मेरी जमीन तू मेरा आसमा

माँ के चरणों में तो है ये सारा यहान,

तू है जग का रीनी माँ ये जग तारना

मेरे सिर पे माँ तू रखदे हाथ

दर तेरे आ गया मेरी माँ

माँ ममता की तू इक धार है

तू जो बरसाती है वो तेरा प्यार है,

तू रहे साथ माँ बस यही प्राथना

मेरे सिर पे माँ तू रखदे हाथ

दर तेरे आ गया मेरी माँ

मेरे हर गुनाहों को तू माफ़ कर

माँ लगा ले गले तेरे आया हु घर,

अपने बेटो पे माँ तू दया ही करना

मेरे सिर पे तू माँ रखदे हाथ

दर तेरे आ गया मेरी माँ

मेरे आँखों में इक तेरा रूप माँ

मैं देखू यहा तेरी सूरत वहा,

तेरे दर पे रहू है यही कामना

मेरे सिर पे तू ररखदे माँ हाथ

दर तेरे आ गया मेरी माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।