झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां ,

काहे के मईया बने है पालना,

काहे के दोई खम्म,झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां ,

चंदन के मईया बने हैै पालना,

रूपे के दोई खम्म, झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां ,

देबी जालपा झूला में झूलें ,

लंगुर झुलाबन हार, झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां ,

सुमर सुमर मई तेरो जस गाउं,

भगतों पै होजईयों दयाल, झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां ,

पातीराम मााई भजन सुनावें,

राखो पाल की लाज, झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां,

झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।