मोरी माई की चुनरिया रंग डारि

गोविंद सिंह बेनाम जी (जबलपुर )
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रंग रिजवा चुनरिया रंग डारी, रंग डारि रंग डारि रंग डारि

रंग रिजवा चुनरिया रंग डारि

मोरी माई की चुनरिया रंग डारि

रंग रिजवा चुनरिया रंग डारि....

झिलमिल झिलमिल लगे सितारे, तारागण से चमके

रूप मोहनी जगदम्बा का, दमक दामिनी दमके

चमके चंदा सी बिंदिया उजियारी

मोरी माई की चुनरिया रंग डारि...

ले सोला सिंगार सुहागन मां के दर पे जावे

मात भवानी जगदम्बा को अपने हाथ सजावे

और सिर पे लाली चुनरिया लगे प्यारी

मोरी माई की ....

रंग रिजवा चुनरिया रंग डारि

चुनरी चाली ध्वजा माई की एक ही रंग में रंग दे

श्रद्धा सबुरी भक्ति भाव के फुंदना लगा कि संग दे

लाली लाली चुनर गोटे वाली,मोरी माई की....

रंग रिजवा चुनरिया रंग डारि....

लाये हैं बेनाम चुनरिया माता तुम्हे चढ़ाने

अपने भगत की मात भवानी याद बिसर ने जाने

देखो गूंजे भवन में जैकारी मोरी माई की ....

रंग रिजवा चुनरिया रंग डारि ....

गायक - उदय लकी सोनी ( दशरमन )

गीतकार - गोविंद सिंह बेनाम जी (जबलपुर )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।