हमनी के छोरी के नगरीया नु हो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हमनी के छोरी के नगरिया नु हो कहवा जयेबू ए माई ,

तुही त हउ मोहे महतरिया नु हो कईसे करी हम बिदाई ,

हमनी के छोरी के नगरिया नु हो कहवा जयेबू ए माई ,

तुही त हउ मोहे महतरिया नू हो कईसे करी हम बिदाई ,

बड़ा रे जतनवा से मुरुती बनावनी,

मूर्ति बनायीं हम तोहके बुलवनी ......

बड़ा रे जतनवा से मुरुती बनावनी,

मूर्ति बनायीं हम तोहके बुलवनी ,

थर थर कापत ता सरिरिया नु हो कईसे मुरुती उठाई,

तुही त हउ मोहे महतरिया नु हो कैसे करी हम बिदाई ,

तोहरे चरनिया में लेयेनी आशिर्बदवा

छोर के तू काहे जालू बेटा के घरवा ,

बन गेलु आँखी के पुतरिया नु हो कैईसे तोहे बिसरायीं,

तुही त हउ मोहे महतरिया नु हो कईसे करी हम बिदाई ,

नवदीन निरखे माई सब सूख पवनी

तोहरे चरनिया में नेहियाँ लगवनी

राउरे चरनिया में नेहियाँ लगवनी

नवदीन निरखे माई सब सूख पवनी

तोहरे चरनिया में नेहियाँ लगवनी

नवदीन निरखे माई सब सूख पवनी

तोहरे पर हमनी के पगारिया नु हो

हरदम लजिया बचायी ,

तुही त हउ मोहे महतरिया नु हो कैसे करी हम बिदाई ,

हमनी के छोरी के नगरिया नु हो कहवा जयेबू ए माई ,

तुही त हउ मोहे महतरिया नु हो कैसे करी हम बिदाई ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।