विरात्रा री पहाड़ियों में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - मीठे रस से भरयोड़ी राधा.....

विरात्रा री पहाड़ियों में धाम थारो ,

म्हाने लागे न्यारो

म्हाने प्यारो प्यारो लागे वाकल ,नाम थारो

शक्ति रूप में हिंगलाज माँ , हिरण भखार में आईं,

श्रद्धा भाव से राजा विक्रम ने , प्रतिस्ठा माँ की कराई

ऊंचे पर्वत पे बाणियो है थारो मंदिर न्यारो ,म्हाने लागे प्यारो

सबसु प्यारो सबसु न्यारो , धाम थारो विरात्रा री पहाड़ियों में

लाल चुनरियाँ , लाल है चुडो , सज सोलह सिणगार

रूप अनूप है माँ वाकल रो , बैठीया सिंह सवार

लागे स्वर्गा सु सूंदर मैया धाम थारो म्हाने लागे प्यारो।

म्हारा हिवड़ा में बसियो वाकल ,नाम थारो विरात्रा री पहाड़ियों में.....

सांचो है दरबार वाकल रो , बिन मंगिया मिल जावे

अन्न धन रो भंडार भरे , बंझिया री गोद भरावे

म्हाने आसरो है मैय्या जी बस एक थारो बस एक थारो

किरपा री नजरिया वाकल महापे डारो विरात्रा री पहाड़ियों में.....

✍️ दिलीप सिंह सिसोदिया

" दिलबर "

नागदा जक्शन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।