जाग पियारी अब का सोवै

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जाग पियारी अब का सोवै

रैन गई दिन काहे को खोवै

जिन जागा तिन मानिक पाया

तैं बौरी सब सोय गँवाया

पिय तेरे चतुर तू मूरख नारी

कबहुँ न पिय की सेज सँवारी

तैं बौरी बौरापन कीन्हो

भर-जोबन पिय अपन न चीन्हो

जाग देख पिय सेज न तेरे

तोहि छाँड़ी उठि गए सबेरे

कहैं 'कबीर' सोई धुन जागै

शब्द-बान उर अंतर लागै

जाग पियारी अब का सोवै

रैन गई दिन काहे को खोवै

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।