बेटी चली है ससुराल

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॥ पावन पाठ ॥

बेटी चली है ससुराल , ओ ओ

अपने बाबुल की होती सदा लाडली

तीन कुलों की लाज है बेटी अब हाथ तुम्हारे

है ये दुआ मेरी जीवन में हों पूरे अपने तुम्हारे

रखना अपना घर खुशहाल ,

अपने बाबुल की होती सदा लाडली

सास ससुर पति और बड़ों की सेवा करना धर्म है

बेटी का लालन पालन शिक्षित करना ये पिता का धर्म है

जीवन सदा हो खुशहाल,

अपने बाबुल की होती सदा लाडली

घर बाबुल के बेटी है रहती महमान हो कोई

पूरा जीवन घर रख पाया नहीं बाबुल कोई

जाना सभी को ससुराल ,

अपने बाबुल की होती सदा लाडली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।