मन मे बसा कर तेरी मूर्ति उतारु मैं गिरधर तेरी आरती

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन मे बसा कर तेरी मूर्ति

उतारू मैं गिरधर तेरी आरती

करुण करो कष्ट हरो ज्ञान दो भगवान

भव में फांसी नाव मेरी तार दो भगवान

दर्द की दवा तुमरे पास है जिंदगी दया की है भीख मांगती

मन में बसा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मागु तुझसे क्या में यही सोचो भगवान

जिंदगी जब तेरे नाम करदी अर्पण

सब कुछ तेरा कुछ न मेरा चिंता है तुझको प्रभु संसार की

मन मे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

वेद तेरी महिमा गए सन्त करे ध्यान

नारद गुणगान करे छेड़ वीणा तान

भक्त तेरे द्वार करते पुकार मोहित व्यास गए तेरी आरती

मन मे ,,,,,,,,,,,

प.मोहित भारद्वाज जी

ज्योतिषाचार्य )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।