तू ही मेरी दुनिया

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - सुरमई अँखियों में

तूही मेरी दुनिया , तेरा मेरा ,

एक अनुठा रिश्ता रे

लाडले तूही मेरी जान ,

तूही तो कुल की शान है

रहे साथ हम ओ रहे साथ

हर जनम हम रहे साथ

तूही मेरी दुनिया तेरा मेरा...

महक उठा घर आँगन मेरा

पाँव पड़ा जब से यहाँ तेरा जागी आशा ,

दूर हुई मेरी निराशा

पूरी हुई मेरी हर कमी , उम्मीदे ये तुझपे थमी

तूही मेरी दुनिया , तेरा मेरा ,

एक अनूठा रिश्ता रे

लाडले तूही मेरी जान ,

तूही तो कुल की शान है

रहे साथ हम ओ रहे साथ

हर जनम हम रहे साथ

युग युग जिये राज दुलारा

तुझपे ही वारु में जीवन सारा

इतना करना , के साथ तू माँ के रहना

मिनल की कहती जुबां , दिलबर माँ की दास्तां

तूही मेरी दुनिया , तेरा मेरा ,

एक अनूठा रिश्ता रे

लाडले तूही मेरी जान ,

तूही तो कुल की शान है

रहे साथ हम ओ रहे साथ

हर जनम हम रहे साथ

✍️ दिलीप सिंह सिसोदिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।