सुखी मेरा परिवार है ये तेरा उपकार है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुखी मेरा परिवार है ये तेरा उपकार है,

मेरे घर का इक इक पत्थर तेरा कर्ज धार है,

देख गरीबी हम गबराए हम रेहते थे परेशान जी

किस्मत हमको लेके गई थी फिर मैया के धाम जी

नजर पड़ी मेरी मैया की भरा पड़ा भंडार है

सुखी मेरा परिवार है ये तेरा उपकार है,

दभी पड़ी है झोपडी मैया के एहसान से,

भरी पड़ी है कुटियाँ मेरी बस माँ के समान से,

जब भी माँगा मैया से किया नही इंकार है

मेरे घर का इक इक पत्थर तेरा कर्ज धार है,

सुखी मेरा परिवार है ये तेरा उपकार है,

जब जब संकट आता है माँ के आगे रोते है

हम तो इसके भरोसे जी खुटी तान के सोते है,

हर पल करती रखवाली ये बन के पेहरे दार है

मेरे घर का इक इक पत्थर तेरा कर्ज धार है,

सुखी मेरा परिवार है ये तेरा उपकार है,

मैया जी का दिल देखा दिल की बड़ी दिलदार है

इस परिवार को ये समजे खुद का ही परिवार है

ज्यदा से ज्यदा वनवारी हम से करती प्यार है,

मेरे घर का इक इक पत्थर तेरा कर्ज धार है,

सुखी मेरा परिवार है ये तेरा उपकार है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।