शेरोवाली माँ द्वार दया के खोल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरोवाली माँ द्वार दया के खोल

मेहरोवाली माँ द्वार दया के खोल

तुझे पुकारे बालक तेरा कुछ तो मुख से बोल

शेरोवाली माँ द्वार दया के खोल

तू जो मैया रूठेगी तो और कहा मैं जाऊ

चरणों की तेरे धुल हु मैं चरणों में तेरे रम जाऊ

बीच भवर नैया मेरी आज रही है डोल

शेरोवाली माँ द्वार दया के खोल

तेरे भरोसे छोड़ दिया है मैंने आज जमाना

आँचल में रख लेना मुझको मेहर जरा कर जाना

दुःख से बरा ये जीवन मेरा सुख से दे तू तोल

शेरोवाली माँ द्वार दया के खोल

इक झलक दिखा दे मैया और नही कुछ भाये

मतलब के रिश्ते सारे याहा कोई निकट ना आये

पूनम से तेरा रिश्ता माँ हो जाये अनमोल

शेरोवाली माँ द्वार दया के खोल

तेरा ही गुणगान करू माँ हर पल शाम सवेरे बबलू पे किरपा भरसाओ दूर करो ये अँधेरे,

कोई भ्जाये ताशे मैया कोई भ्जाये ढोल

शेरोवाली माँ द्वार दया के खोल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।