तेरी दया के फूल माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी दया के फूल माँ जिस को मिल गये,

तेरी किरपा से माँ उनके जीवन सवर गए

तेरी दया के फूल माँ जिस को मिल गये,

जब से ओ मेरी मैया हमने पुकारा तुम को

देकर सहारा मैया तुमने उबारा हमको

थे ठोकरो में माँ अब मंजिल से मिल गए

तेरी दया के फूल माँ जिस को मिल गये,

घूमनाम जिंदगानी कोई पूछता ना था

मुझको कोई भी रास्ता सुजता न था

तेरे दर पे आके माँ मेरे नसीब खुल गए

तेरी ज्योत का उजाला जिस को भी मिल गया

उसके चमन का फूल माँ पल में ही खिल गया

करता रहू गुणगान माँ दीपक यही कहे

तेरी दया के फूल माँ जिस को मिल गये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।