फूलों का झूलना मेरी मैया का

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

फूलो का झुलना मेरी मैया का,

माँ छोटे लेवे कुछ लम्बे लम्बे कुछ छोटे छोटे

फूलो का झुलना मेरी मैया का,

बड़े प्यार से भगत झुलावे बूढ़े बचे हाथ लगावे,

बूढ़े बचे हाथ लगावे माँ को देख खिल खिल जावे

ये झुला है सब की खुशियों का मैया का

फूलो का झुलना मेरी मैया का,

माँ जिस पटरी पर बैठी है वो दुःख दर्दो की पटरी है

अपने कर्मो की गठरी है दमन करे माँ दुःख दर्दो का

फूलो का झुलना मेरी मैया का,

ये डोरी माँ की ममता है इस में कुछ जादू होता है,

इस में कुछ जादू होता है यो पकड़े वो सुख पाता है

हल हमे मिले सपनो का फूलो का झुलना मेरी मैया का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।