तू रोम रोम में मेरे

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तू रोम रोम में मेरे , सांसो में समाया

ओ बाबोसा में तेरे , ख्वाबो में खोया रे

में तेरी प्रीत में पागल , दिल मे तुझे बसाया

में तुझे पुकारू बाबा ,तू कयू नही आया रे

तेरे नाम से मेरी , सांसे चल रही है

तेरी एक कमी मुझे , रोज खल रही है।

दुनिया को छोड़ तुमसे , प्रीत निभाई

फिर क्यों न तुमको मेरी ,याद न आई

मेने जिन्दगी का मालिक , तुझको ही बनाया

तू साथ हमेशा रहना ,बनकर साया रे

में तेरी प्रीत में पागल , दिल मे तुझे बसाया

में तुझे पुकारू बाबा ,तू कयू नही आया रे

मेरे दिल में ओ " दिलबर " तू आके समाजा एक बार तो आजा

मुझे अपना समझकर बाबा ,तू गले लगाजा रे

अनुष्का ,अधिस्ठा की , सुनलो ओ बाबोसा

में छोड़ के झूठी दुनिया , तेरी शरण में आया रे

में पाने तेरा प्यार ,तेरे पास में आया रे

में तेरी प्रीत में पागल , ,तेरे पास में आया रे

।।रचनाकार।।

दिलीप सिंह सिसोदिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।