सुनलो पुकार बाबोसा सरकार

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॥ पावन पाठ ॥

स्वार्थ की दुनिया को छोड़के.

आया बाबोसा तेरे द्वार...

स्वार्थ की दुनिया को छोड़के ,

आया में तेरे द्वार सुनलो ये मेरी पुकार

में तो गया हूं हार , सुनलो बाबोसा सरकार,

करो विनती मेरी स्वीकार

सुनलो ये मेरी पुकार

हर खुशी हुई ओझल , छाये गम के अंधरे

जो कल तक थे अपने , वो आज नही मेरे

एक यही अरदास , बनू में प्रभु चरणो का दास

कर दो प्रभु उपकार सुनलो ये मेरी पुकार

अब छोड़कर तुमको , कही और नही जाऊँ

तेरी चोखट पे " दिलबर " , सारी उम्र बिताऊँ

कहे देव ये बारम्बार , छुटे कभी ना ये दरबार

बाबोसा सरकार

स्वार्थ की दुनिया को छोड़के ,आया में तेरे द्वार,

सुनलो ये मेरी पुकार बाबोसा सरकार

रचनाकार

दिलीप सिंह सिसोदिया " दिलबर "

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।