जहाँ बनते सारे काम वो चुरू धाम

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - जब कोई बात बिगड़ जाये...

जहाँ बाबोसा का बसेरा

वहाँ सुखों का होता सवेरा

इनकी शरण मे आते ही

मिट जाता गम का अंधेरा

जो खोया है , वो पायेगा , जिन्दगी में तू द्वार तो आ,

जहाँ बैठा नाथ मेरा वो चुरूधाम

चमत्कार जो करते हरपल वो तांती भभूति,

जल श्रद्धा से जिसने भी लगाई मिलता फल,

ना कोई है , ना कोई था , दिलबर तेरे सिवा यहाँ

करु नमन में बारम्बार ....वो चुरूधाम

जिस द्वार से मिलता बल

वहाँ हर मुश्किल होती हल

जहाँ होगा काम तेरा

वो चुरूधाम -

।।।।

✍️ रचनाकार ✍️

दिलीप सिंह सिसोदिया

❤️ दिलबर ❤️

नागदा जक्शन म.प्र .

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।