आ भी जाओ जगदम्बे मेरे द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ भी जाओ जगदम्बे मेरे द्वार भवानी मोरे आँगन में

हम ने सुंदर सजाया दरबार भवानी मोरे आंगन में

आ भी जाओ जगदम्बे मेरे द्वार भवानी मोरे आँगन में

चारो और जलाए दीपक तेरी ज्योति जलाई

पान सुपारी ध्वजा नारियल हलवा खीर बनाई

लेके आई मालन फूलो के हार

भवानी मोरे आँगन में

करवा दी है सारे नगर में मैया हमने मुनादी

गाओ शहर हर इक गली को मैया हम ने सजा दी

आ भी जाओ होके शेर सवार भवानी मोरे आँगन में

विनती हम बचो की मैया अब सवीकार करो माँ

हे महा माई दर्शन देदो हे उपकार करो माँ

आ भी जाओ होके शेर सवार भवानी मोरे आँगन में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।