सुंदर रूप अनोखा तेरा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुंदर रूप अनोखा तेरा अद्भुत है शिंगार,

लाल ध्वजा दर पे लहराये पूजे कुल संसार

शेरोवाली की गूंजे जय जय कार

लाटा वाली की गूंजे जय जय कार

सिर पे सोहे मुकट निराला गल में सुंदर गेहने,

पाँव में पायल नाक में नथनी सुहा चोला पेहने,

सिर पे साजे लाल चुनरियाँ गल रत्नों के हार

शेरोवाली की गूंजे जय जय कार

एक हाथ में खंडा चमके इक हाथ में भाला

अष्ट भुजा में शतर विराजे मुख पे तेज निराला

तू ही दुर्गा तू ही शक्ति तेरे रूप हजार

शेरोवाली की गूंजे जय जय कार

एक हाथ से बांटे खुशिया एक से दामन भरती,

बाहों में तेरा चुडा खनके दूर उदासी करती

पापी को भी पल में बक्शे खुशियों के भण्डार

शेरोवाली की गूंजे जय जय कार

केवल जो भी शरण में आया सुख भेवव तू बांटे,

खिल जाए बगियाँ जीवन हटे राहो से कांटे

कभी खिजा न आये चमन में मेहका रहे गुलजार

शेरोवाली की गूंजे जय जय कार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।